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मंदिर मूर्ति प्रतिष्ठापना
विवरण:
मंदिर मूर्ति प्रतिष्ठापना एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है जिसमें किसी देवता की मूर्ति को मंदिर या घर के पूजास्थल में स्थापित और प्रतिष्ठित किया जाता है। यह केवल मूर्ति स्थापित करना मात्र नहीं है, बल्कि यह एक विस्तृत अनुष्ठान है जिसके माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा द्वारा मूर्ति में दिव्य ऊर्जा (प्राण) का संचार किया जाता है।
इस समारोह में आम तौर पर निम्नलिखित शामिल होते हैं:
1. गणेश पूजन एवं संकल्प
2. वास्तु शांति (यदि आवश्यक हो)
3. कलश स्थापना
4. मूर्ति का अनुष्ठानिक शुद्धिकरण (स्नापण / पंचामृत से अभिषेक)
5. देवता के अनुसार विशिष्ट वैदिक मंत्रों का जाप करना
6. प्राण प्रतिष्ठा विधि (मूर्ति में दिव्य उपस्थिति का आह्वान)
7. नेत्र मिलान (देवता की आंखों का प्रतीकात्मक उद्घाटन)
8. हवन और पूर्णाहुति
9. महाआरती एवं प्रसाद वितरण
महत्त्व :
1. दिव्य ऊर्जा का आह्वान
प्राण प्रतिष्ठा के बाद, मूर्ति अब प्रतीकात्मक नहीं रह जाती, बल्कि उसे एक सजीव दिव्य उपस्थिति के रूप में माना जाता है।
2. स्थान का आध्यात्मिक सक्रियण
यह स्थान एक पवित्र और ऊर्जावान आध्यात्मिक केंद्र बन जाता है।
3. दीर्घकालिक आशीर्वाद और सुरक्षा
यह भक्तों के लिए निरंतर दैवीय कृपा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करता है।
4. सांस्कृतिक और धार्मिक निरंतरता
वैदिक विधि से स्थापना करके सनातन परंपराओं का संरक्षण करता है।
5. शुभ आरंभ
किसी नए मंदिर में नियमित पूजा (नित्य पूजा) शुरू होने से पहले यह आवश्यक है।
सामग्री
सूची
6 घंटा
25,000 भारतीय रुपए
