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नवग्रह अनुष्ठान जप एवं हवन
विवरण:
नवग्रह अनुष्ठान जप और हवन एक शक्तिशाली वैदिक विधि है, जिसे नौ ग्रहों की ऊर्जा को शांत और मजबूत करने के लिए किया जाता है: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु।
वैदिक ज्योतिष में, इन नौ ग्रहों को स्वास्थ्य, करियर, विवाह, वित्त और कुल मिलाकर भाग्य पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है। जब ग्रहों की स्थिति असंतुलित या दोषपूर्ण होती है (जैसे दोष, महादशा, साढ़ेसाती आदि), तो इस अनुष्ठान को एक सुधारात्मक आध्यात्मिक उपाय के रूप में संपन्न किया जाता है।
इस अनुष्ठान में आमतौर पर शामिल होते हैं:
1. गणेश पूजन और संकल्प
2. कलश स्थापना
3. नवग्रह बीज मंत्रों का निश्चित संख्याओं में जप
4. प्रत्येक ग्रह से संबंधित विशेष सामग्री का समर्पण
5. नवग्रह हवन मंत्र आहुति के साथ
6. पूर्णाहुति और आरती
महत्त्व :
1. ग्रह संतुलन (ग्रह शांति)
इसका प्राथमिक उद्देश्य ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करना और लाभकारी प्रभावों को मजबूत करना है।
2. कुंडली आधारित दोषों का निवारण
इसका उपयोग तब किया जाता है जब ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों का प्रबल अशुभ प्रभाव दिखाई देता है।
3. करियर और आर्थिक स्थिरता
ग्रहों की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण होने वाली अस्थिरता को कम करने में सहायक।
4. वैवाहिक और रिश्तों में सुधार
मंगल दोष, शनि के प्रभाव या राहु-केतु के प्रभाव की स्थिति में अक्सर इसकी सलाह दी जाती है।
5. आध्यात्मिक सामंजस्य और मानसिक शांति
मंत्रोच्चार और हवन से मानसिक ऊर्जा स्थिर होती है और अशांत समय में स्पष्टता आती है।
सामग्री
सूची
4 घंटा
35,000 भारतीय रुपए
